Book Boost Overview – HINDI

बुक बूस्ट: सभी चुनौतियों के लिए पहुँच

चुनौती का अवलोकन

Book Boost: Access for All Challenge logoपढ़ने का तरीका सीखना परिवर्तनकारी होता है और किसी बच्चे द्वारा उसकी पूरी क्षमता को हासिल करने के आजीवन अवसर को प्रभावित करता है। हालाँकि, दुनियाभर में प्राथमिक विद्यालय जाने योग्य आयु के लगभग 250 मिलियन बच्चे मूलभूत अक्षरों और संख्याओं को पहचानने में असमर्थ हैं, भले ही उनमें से आधे बच्चे स्कूल में कम से कम चार वर्ष का समय बिता चुके हैं।[1] मूलभूत साक्षरता कौशल को बढ़ाने में पुस्तकों के महत्व के बावजूद, पूरी दुनिया में कई मातृ-भाषाओं में बच्चों के लिए पुस्तकों की कमी है। दुनियाभर में अनुमानित 19 मिलियन बच्चों, जो नेत्रहीन हैं या जिनकी दृष्टि कम है[2] या छपा हुआ पढ़ने में अक्षम कई अन्य लाखों बच्चे, के लिए, सुलभ प्रारूपों में अच्छी गुणवत्ता वाली पुस्तकों की कमी और ज़्यादा गंभीर है।

वर्तमान प्रौद्योगिकियाँ प्रकाशकों के लिए ऐसी पुस्तकें प्रकाशित करने की संभावना प्रदान करती हैं जो सुलभ होती हैं और हर किसी के द्वारा पढ़ने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं, जिनमें छपा हुआ पढ़ने में अक्षम बच्चे भी शामिल हैं, लेकिन पूरे पैमाने पर इनका लाभ नहीं उठाया जा रहा है।

सभी बच्चों के पढ़ने के लिए: ए ग्रैंड चैलेंज फ़ॉर डिवेलपमेन्ट (ACR GCD) और Pearson का प्रोजेक्ट लिटरेसी बुक बूस्ट की शुरुआत कर रहे हैं: सभी चुनौतियों के लिए पहुँच, इन अंतरों को दूर करने हेतु प्रकाशन के क्षेत्र में नवीनीकरण को बढ़ावा देने के लिए। इस चुनौती को ऐसे व्यावसायिक मॉडलों की तलाश है जिनका मूल पुस्तक मूल्य श्रृंखला के शीर्षक विकास चरण में सुलभ पुस्तकों की संख्या का अनुकूलन करने और उसे बढ़ाने में है।

प्रतियोगिता में साझेदारों का मानना है कि शीर्षक विकास में होने वाले समाधान समग्र पुस्तक मूल्य श्रृंखला में सुधार करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप ज़्यादा किफ़ायती प्रक्रिया उत्पन्न होगी। एक कुशल मूल्य श्रृंखला, पुस्तक वितरण में शामिल हितधारकों के लिए उपलब्ध, नए, अच्छी गुणवत्ता वाले, सुलभ शीर्षकों की संख्या को बढ़ाएगी।

प्रतियोगिता का संपूर्ण विवरण 26 अक्तूबर 2017 को https://allchildrenreading.org/challenge/book-boost-access-challenge/ पर उपलब्ध होगा

[1] UNESCO। (2014ए). पढ़ाना और सीखना: सभी के लिए गुणवत्ता हासिल करना। EFA वैश्विक निगरानी रिपोर्ट.

[2] WHO. (2014). दृष्टि दोष और दृष्टिहीनता.

 

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